झुंझुनूं के चिड़ावा में ACB की बड़ी कार्रवाई हुई फेल, चकमा देकर भागा घूसखोर पुलिसकर्मी, पुलिसकर्मी को रंगे हाथों पकड़ने गई थी ACB ■ जस्टिस यशवंत वर्मा ने दिया इस्तीफा, ‘जले हुए नोटों’ के विवाद से हुए थे हाईलाइट■ लक्ष्मणगढ़: समाजसेवी आनंद कुमार बागड़ी की 12वीं पुण्यतिथि पर 13 अप्रैल को 4 विभूतियों को फुले अवार्ड से व सरकारी सेवा में चयनित एक दर्जन से अधिक युवाओं को किया जाएगा सम्मानित ■ हरिवंश राज्यसभा के मनोनीत सांसद बने, उपसभापति बन सकते हैं, कार्यकाल 2032 तक रहेगा; नीतीश कुमार ने भी सांसद पद की शपथ ली ■ अप्रैल में मौसम के मिजाज में उतार-चढ़ाव, दिल्ली-हरियाणा में बारिश तो जम्मू-कश्मीर समेत कई राज्यों में गिरेंगे ओले ■
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रेवेन्यू कोर्ट्स में 6.72 लाख जमीनों से जुड़े केस पेंडिंग:64% एसडीएम स्तर पर अटके; कई कोर्ट में सालभर में सिर्फ एक ही केस का निपटारा
जयपुर:राजस्थान में जमीनों से जुड़े मामलों का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है, जहां रेवेन्यू कोर्ट्स में 6.72 लाख से ज्यादा केस लंबित हैं। इनमें से करीब 64 फीसदी मामले केवल एसडीएम स्तर पर ही अटके हुए हैं। हालात यह हैं कि कई कोर्ट में पूरे साल में सिर्फ एक ही केस का निपटारा हो पा रहा है, जिससे न्याय प्रक्रिया की रफ्तार पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
दरअसल, जमीनों से जुड़े विवादों का निपटारा होने में हो रही देरी के कारण सरकार और रेवेन्यू कोर्ट पर काम का दबाव बढ़ता जा रहा है। कोर्ट में काम के हालात ये है कि कई तो ऐसे है जहां पूरे साल में एक ही केस का डिस्पोजल कर पा रहे है।
हाल ही में आई एक रिपोर्ट बताती है कि वर्तमान समय में राज्य के विभिन्न रेवेन्यू कोर्ट (राजस्व मंडल और अधीनस्थ राजस्व कोर्ट) में 6.72 लाख से ज्यादा मामले पेंडिंग है। इस पेंडेंसी के पीछे सबसे बड़ा कारण कर्मचारियों की प्रोपर ट्रेनिंग न होना और कोर्ट में स्टाफ की कमी बताया जा रहा है।
पिछले दिनों सरकार के स्तर पर हुई एक रिव्यू बैठक में ये रिपोर्ट रखी गई। इसमें बताया गया कि राजस्थान में रेवेन्यू कोर्ट में बड़ी संख्या में मामले पेंडिंग है। इनकी संख्या 6 लाख 72 हजार से ज्यादा है। कोर्ट वाइज देखें तो सबसे ज्यादा करीब 4.33 लाख से ज्यादा मामले तो केवल एसडीएम कोर्ट में ही पेंडिंग चल रहे है, जो कुल पेंडेंसी का 64 फीसदी से ज्यादा है।
केस लंबित होने ये है तीन बड़े कारण
सरकार को पेश की गई रिपोर्ट में कोर्ट केसेज के लंबित होने के पीछे कुछ कारण भी बताए है। इसमें सबसे बड़ा कारण कोर्ट में काम करने वाले कर्मचारियों का प्रशिक्षित न होना है। अधिकांश कर्मचारी जो रेवेन्यू कोर्ट या अधीनस्थ कोर्टों में लगे हैं, उन्हें कोर्ट में काम करने का अनुभव या तो कम है या उन्हें प्रोपर ट्रेनिंग नहीं दी गई है।
इसके अलावा दूसरा बड़ा कारण कोर्ट से जारी नोटिस, आदेशों को तामिल करने में हो रही देरी मान रहे है। अक्सर कोर्ट में लगे केसों पर सुनवाई में देरी का बड़ा कारण पक्ष या विपक्ष को तामिल होने वाले नोटिस में देरी होना है।
इसी तरह तीसरा बड़ा कारण कोर्ट में लगने वाले केसों की मौका रिपोर्ट में होने वाली देरी है। अक्सर केस लगने के बाद मौके की रिपोर्ट संबंधित अधिकारियों से मांगी जाती है, तो उसके लिए तहसीलदार, पटवारी या अन्य अधिकारियों की रिपोर्ट में देरी को माना है।
2.17 लाख मामले 5 साल से ज्यादा समय से पेंडिंग
इन रेवेन्यू कोर्ट में लंबित केसों में करीब 2.17 लाख केस ऐसे है, जो पिछले 5 साल या उससे भी ज्यादा समय से पेंडिंग चल रहे है।
रिपोर्ट के मुताबिक, 1.34 लाख से ज्यादा केस (5 से 10 साल की अवधि से), 75 हजार से अधिक केस ऐसे (10 से 20 साल की अवधि) और 6 हजार से ज्यादा केस (20 से 30 साल की अवधि) और 330 से ज्यादा केस ऐसे है, जो 30 साल या उससे ज्यादा समय से पेंडिंग है।
पूरे साल में केवल एक ही केस का डिस्पोजल
कोर्ट में केसों की पेंडेंसी के हालात कितने बुरे हैं ये रिपोर्ट में भी सामने आया है। कुछ कोर्ट तो ऐसी है, जहां पूरे साल में केवल एक ही केस का डिस्पोजल हुआ है। इसमें एसडीओ कोर्ट सादूलशहर (गंगानगर), सहायक कलेक्टर कोर्ट टोंक और अतिरिक्त जिला कलेक्टर (SDM) कोर्ट फलोदी शामिल है। इन दोनों ही कोर्ट में बीते एक साल वित्तवर्ष (1 अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026 तक) में केवल एक-एक केसों का ही डिस्पोजल हुआ है।
घनश्याम तिवाड़ी बोले- अशोक गहलोत और मदन राठौड़ दोनों विद्वान:दोनों के बीच नहीं पड़ना चाहता; कहा- मोहन भागवत ने कभी राजनीति में उम्र का फॉर्मूला तय नहीं किया
जयपुर: राजनीति में 75 साल के बाद सन्यास के फॉर्मूले को लेकर बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ और पूर्व सीएम अशोक गहलोत के बीच छिड़ी बहस को लेकर राज्यसभा सांसद घनश्याम तिवाड़ी ने कहा-
‘दोनों विद्वान व्यक्ति है, मैं दोनों के बीच नहीं पड़ना चाहता हूं लेकिन आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कभी राजनीति में उम्र का फॉर्मूला तय नहीं किया।
उन्होंने खुद भी कहा है कि न तो मैं रिटायर हो रहा हूं, न ही किसी को रिटायर होने के लिए कह रहा हूं।’
घनश्याम तिवाड़ी ने ये बात आज जयपुर एयरपोर्ट पर दिल्ली जाते समय कहीं।
बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ आज प्रदेश बीजेपी कार्यालय में मीडिया को संबोधित कर रहे थे।
राठौड़ और गहलोत के बीच छिड़ी बहस
दरअसल, मंगलवार को बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने पूर्व सीएम अशोक गहलोत को 75 साल की उम्र पार करने के बाद सन्यास आश्रम की ओर प्रस्थान करने का सुझाव दिया था। जिस पर पलटवार करते हुए आज सुबह गहलोत ने कहा कि यह फॉर्मूला आरएएस प्रमुख मोहन भागवत और पीएम मोदी पर लागू होता है, मेरे पर यह लागू नहीं होता है। मैं तो 100 साल तक जनता की सेवा करता रहूंगा।
गहलोत-डोटासरा-जूली जलेबी रेस में दौड़ रहे
बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने कहा कि पूर्व सीएम अशोक गहलोत, पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली जलेबी रेस में दौड़ रहे हैं। तीनों को लगता है कि मैं जलेबी लपक लूं।
उन्होंने कहा कि आज बयानों की राजनीति हो गई हैं। मैं तो कहना चाहता हूं कि ट्वीट की राजनीति छोड़कर इन्हें धरातल पर काम करना चाहिए लेकिन आज कांग्रेस का केंद्रीय नेतृत्व टीकाराम जूली को महत्व देने लगा हैं। डोटासरा को अपनी जमीन खिसकते हुए नजर आ रही है, वहीं अशोक गहलोत भी लग रहा है कि उनके मुंगेरी लाल के सपनों में अड़चन आ सकती हैं।
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जयपुर: जयपुर सेंट्रल जेल में जेल विभाग और आरएसी की सख्ती के बाद भी जेल प्रहरियों के पास सामान मिलने का सिलसिला जारी है। सर्च के दौरान जेल प्रहरी को वार्ड नंबर 8 की मेन दीवार के बीच में एक पार्सल मिला। पार्सल में एक हल्के रंग की टेनिस बॉल मिली। टेनिस बॉल को काट कर खोला गया तो उसमें 2 नग पताका, 502 बीडी और कुबेर जर्दे की पुड़िया मिली।
जयपुर सेंट्रल जेल प्रहरी ज्योति जांगिड़ ने लाल कोठी थाने में एक रिपोर्ट दी। रिपोर्ट में बताया कि उन्हें सर्च के दौरान जानकारी मिली की जेल में टेनिस बॉल के जरिए बीड़ी-जर्दा आ रहा हैं। तलाशी के दौरान बॉल के अंदर बीड़ी और जर्दा मिला। जेल में बंद कैदी और बंदियों से पूछताछ की गई तो कोई जानकारी नहीं दी।
एएसआई लाल कोठी थाना सूरजमल ने बताया कि जेल प्रहरी ज्योति की रिपोर्ट दर्ज कर ली गई हैं। जेल में कैसे बॉल के जरिए यह सभी सामान पहुंचाई जा रही है और कहां से यह बॉल आ सकती है, इसे लेकर जांच की जाएगी।
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हाईकोर्ट ने कहा- बेटे और दामाद में कोई अंतर नहीं:बेटे को माता-पिता के अंतिम संस्कार के लिए जमानत मिलती है तो दामाद को क्यों नहीं
जयपुर : राजस्थान हाईकोर्ट ने दामाद को उसकी सास के अंतिम संस्कार की क्रियाओं में शामिल होने के लिए 10 दिन की अंतरिम जमानत दी है। जस्टिस अनूप कुमार ढंढ की कोर्ट ने 30 मार्च को सुनवाई की थी।
कोर्ट ने कहा- जब न्यायालय अपने दिवंगत माता-पिता के अंतिम संस्कार और रीति-रिवाजों को पूरा करने के लिए बेटों द्वारा दायर अंतरिम जमानत याचिकाओं को स्वीकार करने में उदारता दिखाता है, तो निश्चित रूप से दामाद को भी वही अधिकार मिलने चाहिए। याचिकाकर्ता अपने ससुराल में रह रहा था।
कोर्ट ने आगे कहा- आज समाज बदल गया है। बेटे और दामाद के बीच कोई अंतर नहीं किया जा सकता है।
कोर्ट ने सेन्ट्रल जेल कोटा के अधीक्षक को निर्देश दिया कि वह आरोपी को 10 दिन के लिए रिहा करे। साथ ही, आरोपी को जमानत अवधि पूरी होने के तुरंत बाद अधीक्षक के सामने पेश होने का भी आदेश दिया।
बेटी ने किया था अंतिम संस्कार वकील सुरेन्द्र कुमार लांबा ने कोर्ट को बताया- याचिकाकर्ता गिर्राज को कोटा के बोरखेड़ा थाना पुलिस ने हत्या के आरोप में साल 2024 में गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी से पहले आरोपी अपनी पत्नी और सास के साथ ही रह रहा था। गिर्राज की सास का निधन 1 मार्च को हो गया था।
उनका अंतिम संस्कार 2 मार्च को गिर्राज की पत्नी ने किया, लेकिन परिवार में एकमात्र पुरुष होने के कारण अन्य क्रियाएं नहीं हो सकीं। इन अंतिम क्रियाओं को पूरा करने के लिए अंतरिम जमानत दी जाए। इसे कोर्ट ने स्वीकार करते हुए जमानत मंजूर की।
पुलिस से मांगी तथ्यात्मक रिपोर्ट जमानत याचिका दायर होने के बाद कोर्ट ने संबंधित थानाधिकारी को मामले में तथ्यात्मक रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए थे। एसएचओ बोरखेड़ा ने भी अपनी रिपोर्ट में बताया कि हत्या का मामला दर्ज होने से पहले तक आरोपी अपनी सास के घर पर ही रह रहा था।
उसकी सास के कोई बेटा नहीं है। कोर्ट ने अंतरिम जमानत मंजूर करते हुए एसएचओ की रिपोर्ट को रिकॉर्ड पर लेने के निर्देश दिए हैं।
राजस्थान में नकली दवाओं का खुलासा, भरतपुर से जयपुर तक 4 लाख की खेप पकड़ी; एक एंटीबायोटिक मेडिसिन बैन
राजस्थान में नकली दवाओं के कारोबार का बड़ा खुलासा हुआ है। भरतपुर से शुरू हुई एक सामान्य जांच ने पूरे प्रदेश में फैले इस संगठित नेटवर्क की परतें खोल दीं। औषधि नियंत्रण विभाग ने टेबलेट क्यूसिपोड 200 (बैच नंबर वीटी 242312) का नमूना लिया, जो लैब जांच में नकली पाया गया।
इसके बाद राज्य औषधि नियंत्रक अजय फाटक ने तुरंत अलर्ट जारी करते हुए इस दवा की बिक्री और उपयोग पर रोक लगा दी और सभी जिलों को सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। यह एक एंटीबायोटिक मेडिसिन है, जो बैक्टीरियल इन्फेक्शन के इलाज में दी जाती है।
4 लाख रुपए की नकली दवाएं जब्त
इसका उपयोग आमतौर पर गले और टॉन्सिल का इन्फेक्शन साइनस, फेफड़ों का संक्रमण, ब्रोंकाइटिस, निमोनिया, कान का इन्फेक्शन, मूत्र मार्ग संक्रमण (यूटीआई) और त्वचा के बैक्टीरियल इन्फेक्शन के इलाज में होता है। जयपुर में सहायक औषधि नियंत्रक के नेतृत्व में टीम ने इक्यूमेड हेल्थकेयर पर छापा मारा, जहां से करीब 4 लाख रुपए की नकली दवाएं बरामद कर जब्त की गईं।
हिमाचल-उत्तराखंड तक पहुंची जांच
जांच में सामने आया कि यह दवा हिमाचल प्रदेश के बद्दी स्थित वीएडीएसपी फार्मास्यूटिकल्स नामक निर्माता फर्म से सप्लाई की गई थी। मामले में अन्य दवाओं के नमूने जांच के लिए भेजने के साथ स्टॉक को सीज किया गया है। जालोर और भरतपुर में भी दवा विक्रेताओं की जांच की जा रही है। नेटवर्क की जड़ तक पहुंचने के लिए राज्य स्तर पर टीमें हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड भेजने के निर्देश दिए गए हैं।
500 से भी ज्यादा दवाएं बनाती है संबंधित कंपनी
ड्रग विभाग के अधिकारियों के अनुसार संबंधित कंपनी 500 से अधिक प्रकार की दवाएं बनाती है। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि अन्य दवाओं में भी इसी तरह की गड़बड़ी हो सकती है।
Kanpur Weather:शाम होते ही बदलेगा मौसम का मिजाज, तपती दोपहर के बाद बरसेगी राहत
IMD Forecast:कानपुर में शुक्रवार को तापमान 40 डिग्री तक पहुंच सकता है। दिनभर तेज धूप रहेगी, लेकिन शाम को लो-प्रेशर बनने से बादल छा सकते हैं और हल्की बूंदाबांदी से मौसम सुहावना हो सकता है।
कानपुर : कानपुर में मौसम का ‘ट्विस्ट’: दिन में 40 डिग्री की तपिश, शाम को बूंदाबांदी से राहत के आसारकानपुर में गर्मी ने अब अपने तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। शुक्रवार को शहर का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की संभावना जताई गई है, जिससे दिन के समय लोगों को तेज धूप और उमस का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि राहत की बात यह है कि शाम होते-होते मौसम करवट ले सकता है और हल्की बूंदाबांदी के साथ सुहावना माहौल बन सकता है।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, दिनभर की तेज धूप के कारण स्थानीय स्तर पर लो-प्रेशर (कम दबाव) की स्थिति बनती है। यही लो-प्रेशर शाम के समय नम हवाओं को अपनी ओर खींचता है, जिससे आसमान में बादल बनने लगते हैं। इसके चलते शहर के कई हिस्सों में हल्की बारिश या बूंदाबांदी हो सकती है। यह बदलाव दिनभर की तपिश से परेशान लोगों को बड़ी राहत दे सकता है।
वरिष्ठ मौसम विशेषज्ञ डॉ. एसएन सुनील पांडेय का कहना है कि फिलहाल इसी तरह का मौसम पैटर्न बना रहेगा। यानी दिन में तेज गर्मी और शाम को हल्की राहत का सिलसिला कुछ दिनों तक जारी रह सकता है। उन्होंने बताया कि जैसे-जैसे तापमान बढ़ेगा, वैसे-वैसे लो-प्रेशर बनने की संभावना भी बढ़ेगी, जिससे बादल और हल्की बारिश की स्थितियां बन सकती हैं।
हालांकि, देश के कई हिस्सों में इस समय चक्रवाती हवाओं का असर और बादलों की लंबी श्रृंखला बनी हुई है, लेकिन इसका सीधा असर कानपुर और आसपास के इलाकों पर नहीं पड़ रहा है। यही वजह है कि यहां मौसम स्थानीय कारकों के आधार पर ही बदल रहा है।
शहरवासियों के लिए यह मौसम एक तरह का मिश्रित अनुभव लेकर आ रहा है। दिन में जहां धूप से बचाव के लिए सावधानी जरूरी है, वहीं शाम को मौसम का मिजाज खुशनुमा हो सकता है। विशेषज्ञों की सलाह है कि लोग दिन के समय धूप से बचने के लिए जरूरी उपाय करें—जैसे पानी ज्यादा पिएं, बाहर निकलते समय सिर को ढकें और धूप में ज्यादा देर तक रहने से बचें।
कानपुर का मौसम इन दिनों ‘गर्मी और राहत’ के बीच झूलता नजर आ रहा है। जहां सूरज दिन में अपनी पूरी ताकत दिखा रहा है, वहीं शाम को बादल और बूंदाबांदी लोगों को सुकून देने के लिए तैयार हैं। आने वाले दिनों में तापमान भले बढ़े, लेकिन अगर शाम का यह मौसम यूं ही बना रहा, तो गर्मी का असर कुछ हद तक कम महसूस होगा।
Jaipur सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ सक्रियराजधानी सहित कई जिलों में आज भी अलर्ट, दक्षिणपूर्वी जिलों पर दिखेगा ज़्यादा तेज असर, उदयपुर, अजमेर, कोटा, जयपुर, भरतपुर संभाग और शेखावाटी के क्षेत्रों में अलर्ट, तेज आंधी-बारिश और कहीं कहीं ओलावृष्ठि होने के आसार, 5-6 अप्रैल को बारिश की एक्टिविटीज में होगी थोड़ी कमी, 7 अप्रैल से एक और मजबूत पश्चिमी विक्षोभ होगा सक्रिय, जिससे कई क्षेत्रों में फिर बारिश होने के आसार
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