रामगढ़ शेखावाटी: कस्बे के नए बस स्टैंड स्थित अमरी सती मंदिर परिसर में संत समाज की ओर से से संचालित गो-सम्मान आह्वान अभियान महायात्रा के आगमन पर रविवार शाम भव्य स्वागत एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में क्षेत्र के गोसेवकों, श्रद्धालुओं एवं संत समाज की भारी उपस्थिति रही। इस अवसर पर आयोजित विशेष बैठक में गोसंरक्षण और गोसेवा के महत्व पर विस्तृत चर्चा की गई।
🕉️ गोमाता हैं समस्त देवी-देवताओं का निवास
संत बालयोगी सूर्यनाथ महाराज कारंगा ने मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में गोमाता को सर्वोच्च स्थान प्राप्त है। उन्होंने स्पष्ट किया कि गोमाता केवल एक पशु नहीं, बल्कि समस्त देवी-देवताओं का निवास स्थान हैं। हमारे वेदों और शास्त्रों में गो-महिमा का विस्तृत वर्णन मिलता है।
महाराज ने वर्तमान समय में गोवंश पर हो रहे अत्याचारों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा, “देशभर में संत समाज द्वारा चलाया जा रहा यह अभियान गोहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की दिशा में एक ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण कदम है।”
⚖️ केंद्र स्तर पर कठोर कानून और अलग मंत्रालय की मांग
समारोह में संत समाज ने सरकार से दो प्रमुख मांगें रखीं:
- केंद्र स्तर पर कठोर कानून: गोहत्या रोकथाम के लिए समग्र और प्रभावी कानून बनाया जाए।
- गोसेवा मंत्रालय का गठन: गोसंरक्षण एवं गोसेवा के लिए एक स्वतंत्र मंत्रालय की स्थापना की जाए, ताकि पूरे देश में समान रूप से गोसंरक्षण कार्य प्रभावी ढंग से संचालित हो सके।
संत समाज ने 27 अप्रैल को ‘गो-सम्मान दिवस’ के रूप में मनाने का आह्वान भी किया है। लोगों से अपील की गई है कि वे अपने उपखंड अधिकारी के नाम ज्ञापन सौंपकर केंद्र एवं राज्य सरकारों से गोसंरक्षण हेतु ठोस कदम उठाने की मांग करें।
🙏 अन्य संतों का मार्गदर्शन एवं आभार प्रदर्शन
इस अवसर पर चन्द्रमादास महाराज (हनुमान गढ़ी, अयोध्या) एवं योगीदास महाराज (गोल्याणा) ने भी अपने विचार रखे और गोसेवा को समाज सुधार का आधार बताया।
कार्यक्रम के अंत में कस्बे के गोसेवकों की ओर से गुड्डूबाई किन्नर ने संत समाज का आभार व्यक्त करते हुए कहा, “इस प्रकार के जागरूकता अभियान समाज में नई ऊर्जा संचारित करते हैं और लोगों को गौसेवा के लिए प्रेरित करते हैं।”
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में गोसेवकों व श्रद्धालुओं ने भाग लिया और गोसंरक्षण के संकल्प को दोहराया।
📌 शेखावाटी टुडे विशेष:
गोसंरक्षण केवल एक अभियान नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक विरासत की रक्षा है। आइए, हम सब मिलकर इस पुनीय कार्य में योगदान दें।





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