न्यामा मंदिर न्यास महंत को एकल प्रन्यासी पद से हटाया: देवस्थान विभाग को मिली जिम्मेदारी, कोर्ट ने सुनाया फैसला

लक्ष्मणगढ़ कस्बे के ऐतिहासिक न्यामा मंदिर न्यास को लेकर अपर जिला न्यायाधीश श्वेता शर्मा ने महत्वपूर्ण आदेश जारी किए हैं। न्यायालय ने मंदिर के महंत महावीरदास को एकल न्यासी के पद से अयोग्य मानते हुए तुरंत प्रभाव से हटाने के आदेश दिए हैं।

न्यायालय ने राजस्थान सार्वजनिक प्रन्यास अधिनियम 1959 की धारा 49 के तहत मंदिर की संपत्तियों का नियम विरुद्ध विक्रय माना है। हालांकि, महंत महावीरदास को गुरु-शिष्य परंपरा के निर्वहन के लिए मंदिर में पूजा-अर्चना करने की अनुमति प्रदान की गई है।

ये आदेश सामाजिक कार्यकर्ता एवं व्यवसायी सुभाष जाजोदिया की याचिका पर पारित किया गया। न्यायालय ने देवस्थान विभाग जयपुर के सहायक आयुक्त (द्वितीय) को मंदिर का कार्यवाहक प्रन्यासी नियुक्त किया है और उन्हें निर्देशित किया है कि वे मंदिर की बेची गई चल-अचल संपत्तियों को पुनः प्राप्त करें या प्रतिफल राशि वसूल करें।

इसके अतिरिक्त, मंदिर न्यास की व्यवस्था, प्रबंधन, विकास एवं अन्य संबंधित निर्णय लेने का अधिकार भी सहायक आयुक्त को सौंपा गया है।

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