लक्ष्मणगढ़: शेखावाटी अंचल के सिद्ध संत ब्रह्मलीन श्रद्धानाथ महाराज की 40वीं बरसी बुधवार को श्रद्धा, आस्था और भक्ति के साथ मनाई गई। इस अवसर पर विभिन्न जिलों और प्रदेशों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु आश्रम पहुंचे और समाधि पर धोक लगाकर आशीर्वाद प्राप्त किया।
इस मौके पर आश्रम के पीठाधीश्वर संत बैजनाथ महाराज को भारत सरकार द्वारा प्रदान किए गए पद्मश्री अलंकरण से सम्मानित किया गया। स्वास्थ्य कारणों से दिल्ली नहीं जा पाने के कारण राष्ट्रपति के प्रतिनिधि के रूप में सीकर जिला कलेक्टर मुकुल शर्मा ने आश्रम पहुंचकर उन्हें यह सम्मान सौंपा।
बाल कलाकार शिष्यों ने गाए भजन
समारोह की शुरुआत युवा संत प्रकाशनाथ महाराज ने दीप प्रज्वलन और मंगलाचरण के साथ की। कार्यक्रम में खराड़ी संगीत घराने के युवा संगीत गुरु जयकांत खराड़ी के निर्देशन में उनके बाल कलाकार शिष्यों तथा निवाई के संत प्रकाश दास महाराज ने भक्ति भरे भजन प्रस्तुत किए, जिनसे वातावरण भक्तिरस में सराबोर हो गया।
कार्यक्रम में उपखंड अधिकारी मोहर सिंह मीणा, पुलिस उप अधीक्षक दिलीप मीणा, न्यायाधीश लक्ष्मण सिंह व प्रशांत चौधरी, नगरपालिका ईओ नवनीत कुमार कुमावत, वरिष्ठ भाजपा नेता दिनेश जोशी, नगरपालिका अध्यक्ष मुस्तफा कुरैशी सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।
इस अवसर पर आश्रम की सभी पीठों के संतों और शिष्यों ने पीठाधीश्वर बैजनाथ महाराज का माल्यार्पण कर साफा पहनाया और आशीर्वाद प्राप्त किया। कार्यक्रम के समापन पर संत प्रकाशनाथ महाराज ने जिला कलेक्टर मुकुल शर्मा को प्रतीक चिन्ह भेंटकर सम्मानित किया।
6 साल की उम्र में बने संन्यासी, कोठ्यारी में रहे प्रिंसिपल
संत बैजनाथ महाराज का जन्म 12 जून 1935 को लक्ष्मणगढ़ के पनलावा गांव में हुआ। वे महज 6 साल की उम्र में श्रद्धानाथ महाराज के शिष्य बन गए। दसवीं कक्षा उन्होंने प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण की और नवलगढ़ के पोद्दार कॉलेज से बीए की पढ़ाई पूरी की।1960 में वे ग्राम भारती विद्यापीठ कोठ्यारी के प्रिंसिपल बने। यह उस समय का नामी स्कूल था, जहाँ दूर-दराज़ से विद्यार्थी पढ़ने आते थे।
1985 तक वे इस विद्यालय के प्रिंसिपल रहे। इसके बाद उन्हें नाथ आश्रम का पीठाधीश्वर बना दिया गया। पीठाधीश्वर बनने के बाद भी उन्होंने शिक्षा की अलख जगाना जारी रखा। आश्रम में योग और वेदों का अध्ययन करने देशभर से विद्यार्थी आते रहे हैं।
12 साल की उम्र में हुई सगाई, खुद ने तोड़ दी
बैजनाथ महाराज की सगाई उनके पिता झाबरमल शर्मा ने 12 वर्ष की आयु में दीनवा गांव में कर दी थी। लेकिन उनका मन गृहस्थ जीवन की ओर नहीं था। इस कारण वे स्वयं दीनवा गांव गए और सगाई तोड़ दी। इस पर उनके पिता नाराज़ हो गए और पढ़ाई का खर्चा बंद कर दिया। इसके बावजूद बैजनाथ महाराज ने हिम्मत नहीं हारी और ट्यूशन पढ़ाकर अपनी पढ़ाई पूरी की।
होम्योपैथी चिकित्सा शिविर में रोगियों को परामर्श व दवा निःशुल्क दी।
शेखावाटी होम्योपैथिक मेडिकल एसोसिएशन, चूरू एवं विशाल सिंह शेखावत निहाल कंवर सा मेमोरियल ट्रस्ट कुमास/चूरू के संयुक्त तत्वावधान में एक दिवसीय निःशुल्क होम्यो. चिकित्सा शिविर लक्ष्मणगढ़ स्थित श्रद्धानाथ आश्रम में ब्रम्हलीन सिद्ध संत श्रद्धानाथ जी महाराज की 40वीं पुण्यतिथि (बरसोदी) पर आश्रम के पीठाधीश्वर पदमश्री संत बैजनाथ जी महाराज के सानिध्य में सम्पन्न हुआ। आश्रम के प्रकाशनाथ जी ने बताया कि होम्योपैथी युनिवर्सिटी, जयपुर के संरक्षक एवं सलाहकार डॉ. अमरसिंह शेखावत के नेतृत्व में डॉ. बी.एल. गौड़, डॉ. कौशल, डॉ. राजपाल मायल, डॉ. डी.दास, डॉ. हर्षवर्द्धन सिंह शेखावत, विजय कुमार गोस्वामी की टीम ने कुल 206 रोगियों को निःशुल्क परामर्श एवं आवश्यकता के अनुसार दो माह तक की सभी दवाईयां निःशुल्क प्रदान की।
चिकित्सा शिविर प्रभारी एसोसिएशन एवं ट्रस्ट के अध्यक्ष डॉ. अमरसिंह शेखावत के अनुसार पथरी, जोड़ों का दर्द, सोरायसिस, सफेद दाग, एग्जीमा सहित अन्य चर्म रोग तथा प्रोस्टेट, पाईल्स, ट्यमूर, रसोली, मस्से, बच्चेदानी की गांठ, एलर्जी-नजला, एलर्जी (चर्म रोग), बाल झड़ना, दमा रोगियों की संख्या अधिक रही।
शिविर का कलेक्टर ने किया अवलोकन
राष्ट्रपति के प्रतिनिधि के रूप में जिला कलक्टर, सीकर मुकुल शर्मा ने सिद्ध संत बैजनाथ जी महाराज को सम्मानपूर्वक पदमश्री पुरस्कार प्रदान किया। इसी अवसर पर होम्यो. चिकित्सा शिविर का अवलोकन करते हुए जिला कलक्टर, सीकर ने रूग्ण मानव की महत्ति निःशुल्क चिकित्सा के लिए एसोसिएशन एवं ट्रस्ट की प्रशंसा करते हुए चिकित्सा शिविर के चिकित्सकों को मानव सेवा के लिए धन्यवाद दिया।
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