चूरू : जिले के राजगढ़ के अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश मुनेश चंद्र यादव ने 6 साल पुराने मंजीत हत्याकांड में ऐतिहासिक फैसला सुनाया। कोर्ट ने आरोपी प्रेमी नरेश कुमार और प्रेमिका बबिता को आजीवन कारावास की सजा सुनाते हुए दोनों पर 20-20 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया।
पति की हत्या की साजिश
मामला बजावा सुरो गांव का है। बबिता की शादी मंजीत से हुई थी, लेकिन उसका नरेश कुमार से शादी से पहले से प्रेम संबंध था। शादी के बाद भी यह रिश्ता जारी रहा, जिससे पति-पत्नी के बीच अक्सर विवाद होता था।
नरेश को कई बार बबिता के ससुराल में देखा गया था। जब मंजीत ने विरोध किया तो दोनों ने उसे मारने की धमकी दी। हत्या से कुछ दिन पहले नरेश, मंजीत को उसके घर पर भी जान से मारने पहुंचा, लेकिन घर पर अन्य सदस्य मौजूद होने से वह नाकाम रहा।
इस तरह दी गई मौत
घटना वाले दिन मंजीत मोटरसाइकिल से अपने गांव लौट रहा था। तभी नरेश और बबिता ने मिलकर गाड़ी से टक्कर मारकर उसकी हत्या कर दी।
गवाह और सबूतों ने पकड़ी पोल
पुलिस ने दोनों के खिलाफ धारा 302/34 और 120बी के तहत आरोप पत्र पेश किया। मामले में 19 गवाहों की गवाही और 77 दस्तावेज कोर्ट में पेश किए गए।
कोर्ट ने परिस्थितिजन्य साक्ष्य और मोबाइल कॉल डिटेल को सबसे अहम मानते हुए दोनों को दोषी करार दिया।
जज मुनेश चंद्र यादव ने फैसले में कहा कि मृतक मंजीत अपने माता-पिता की इकलौती संतान था। इसलिए उचित मुआवजा दिलाने के लिए केस को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को भेजा जाए।
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