फतेहपुर (शेखावाटी): मंडावा रोड स्थित पिंजरापोल गोशाला की सैकड़ों बीघा गोचर भूमि से जुड़े विवाद ने अब तूल पकड़ लिया है। गुरुवार को पिंजरापोल गोशाला के पदाधिकारी एवं सदस्यों ने राजस्थान पुलिस के एस. सेंगाथिर (ADG, विजिलेंस) को ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि पिंजरापोल संस्था की लगभग 1100 बीघा गोचर भूमि को हड़पने के लिए कूटरचित दस्तावेज तैयार कर अवैध रूप से उपहार पत्र (गिफ्ट डीड) एवं विक्रय पत्र (सेल डीड) पंजीबद्ध करवा लिए गए। कमेटी ने इस पूरे मामले में अभिलेखों में हेराफेरी करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
पिंजरापोल के सचिव सुनील कुमार बूबना ने बताया कि उक्त भूमि पूर्व में खसरा नंबर 1181, 1183 एवं 1186/1 के अंतर्गत आती है, जिसे तत्कालीन राव राजा बहादुर सिंह से भजनलाल जयदयाल द्वारा वर्ष 1927 में 27,001 रुपये में खरीदा गया था। इस भूमि का उपयोग गोचर, तालाब, कुआं, बगीची एवं निर्माण कार्यों के लिए निर्धारित था। बाद में वर्ष 1956 में काश्तकारी अधिनियम लागू होने पर यह भूमि खातेदारी गोचर के रूप में दर्ज हो गई।
मामले में मैना देवी चैरिटेबल ट्रस्ट के ट्रस्टी संत कुमार एवं संजय कसेरा द्वारा सुमेर कुमार सैनी सहित 24 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है। ज्ञापन में इन सभी के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की गई है।
इस दौरान मधुसूदन भिंडा, बाबूलाल झालाणी, ओम बलारा, एडवोकेट गिरधारी निर्मल, मख्खन लोहिया, पार्षद दिनेश बिंयाला, किशोर जाटी, प्रदीप पारिक, शिव जोशी, राजू राहड़, शुभप्रसाद पारिक, गुटुसैन सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।






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