मदरसा बोर्ड में फर्जीवाड़ा : तीन पैराटीचर विदेश में ‘बसे’ और मानदेय सरकार से उठा रहे; विनियमित अभ्यर्थियों के दस्तावेज तक नहीं जांचे गए

जयपुर: मदरसा बोर्ड में कार्यरत तीन पैराटीचर्स के विदेश में रहकर मानदेय उठाने का मामला सामने आया है। तीनों झुंझुनूं में कार्यरत हैं। तीनों उन 5562 पैराटीचर्स में हैं, जिन्हें नियमित करने की कार्रवाई की जा रही थी। विधानसभा चुनाव से पहले 3699 प्राइवेट मदरसों में कार्यरत सभी पैराटीचर्स को कांट्रेक्चुअल हायरिंग टू सिविल रूल्स 2022 में शामिल कर लिया गया। दस्तावेजों का सत्यापन कराए बिना ही मई, 2023 में उनके नियुक्ति आदेश निकाल दिए गए।

 

चौंकाने वाला तथ्य यह भी है कि नियुक्ति आदेश पर तत्कालीन सचिव के साथ अध्यक्ष के भी हस्ताक्षर हैं, जबकि, नियमानुसार ऐसा नहीं होना चाहिए था। अब सरकार ने सभी जिला अल्पसंख्यक अधिकारियों से सभी मदरसों में तैनात इन पैराटीचर्स के दस्तावेज सत्यापन का आदेश दिया है।

विदेश नहीं जा सकते नियमानुसार

बोर्ड का कहना है कि सरकार ने पैराटीचर्स को नियमित करने के लिए नौ साल की नियमित एवं संतोषजनक सेवा का प्राधवान किया है। मदरसा धनूरी-कायमसर, मदरसा इस्लामियां मलसीसर एवं मदरसा अंजुमन हिमायतुल नवलगढ़ के पैराटीचर्स बिना सूचना के विदेश चले गए। इनमें से एक के वापस आने की सूचना भी है। किसने इनकी छुट्‌टी मंजूर की । इसकी कोई जानकारी बोर्ड के पास नहीं है। गौरतलब है कि मदरसे प्राइवेट हैं और वहां लगे पैराटीचर्स को सरकार मानदेय देती है।

सचिव ने कहा- फाइलों पर सिर्फ अभ्यर्थियों के हस्ताक्षर
बोर्ड के मौजूदा सचिव चेतन चौहान का कहना कि पैराटीचर्स को सरकारी नौकरी दिए जाने से पहले कांट्रेक्चुअल हायरिंग टू सिविल रूल्स 2022 के तहत एडोप्ट किया गया। लेकिन, अभ्यर्थियों के दस्तावेजों एवं नियुक्ति फाइलों पर न तो किसी कमेटी या अधिकारी के हस्ताक्षर है न ही कोई नोटशीट। सिर्फ अभ्यर्थियों के हस्ताक्षर हैं। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि तीन नियुक्ति पत्र प्राप्त तीन पैराटीचर्स विदेश चले गए। जबकि सूचना देना होती है। पता लगा रहे हैं कि उन्होंने कितना मानदेय उठाया है।

5562 पैराटीचर्स की नियुक्तियों की जांच होगी

बोर्ड के तत्कालीन अधिकारियों ने कांट्रेक्चुअल हायरिंग टू सिविल रूल्स 2022 के तहत 3699 मदरसों के 5220 शिक्षा अनुदेशक, 39 शिक्षा सहयोगी, 88 कंप्यूटर शिक्षा सहयोगी और 215 कंप्यूटर अनुदेशक को शामिल किया था।

विधानसभा चुनाव से पहले नियुक्ति आदेश दिए गए थे। इस पर अध्यक्ष एमडी चोपदार और तत्कालीन सचिव सैयद मुकर्रम शाह के हस्ताक्षर हैं। लेकिन, पैराटीचर्स की एक भी फाइल पर दोनों के हस्ताक्षर नहीं हैं। ऐसे में इनको नियमित करने की फाइलों को खंगाला गया तो सामने आया कि दस्तावेज सत्यापित ही नहीं किए गए और नियुक्तियां दे दी गईं।

इधर, बोर्ड के अध्यक्ष एमडी चोपदार का कहना है कि कहीं कोई विदेश में गया है तो उसे बुला लीजिए। नियमानुसार ही विदेश गए होंगे। जहां तक नियुक्ति पत्र बांटने का सवाल है तो यह बोर्ड अध्यक्ष के नाते मेरा अधिकार है। दस्तावेजों की पड़ताल के बाद ही नियुक्तियां दी गई हैं।

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