12वीं की किताब में कांग्रेसी-प्रधानमंत्रियों पर पाठ,मोदी का सिर्फ जिक्र : शिक्षा मंत्री दिलावर भड़के, बोले- नहीं पढ़वाएंगे; अफसर बोले- अब तक 80 फीसदी बंट गईं

राजस्थान में 12वीं की किताब ‘आजादी के बाद का स्वर्णिम इतिहास’ पर सियासी बवाल हो गया है। दरअसल, इस किताब में गांधी-नेहरू परिवार सहित कांग्रेसी प्रधानमंत्रियों पर बहुत सारा कंटेंट है।

लेकिन 11 साल से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के योगदान पर पढ़ने के लिए बहुत कम जानकारी दी गई है। मोदी को तवज्जो नहीं मिलने के कारण अब सरकार ने किताब विद्यार्थियों को नहीं पढ़ाने का फैसला कर लिया है।

वहीं, राज्य पाठ्यपुस्तक मंडल नए सत्र (2025) के लिए छपकर आईं 4.90 लाख किताबों को 19,700 स्कूलों में बांट रहा है। इतना ही नहीं, करीब 80 फीसदी किताबें बंट भी चुकी हैं।

तर्क यह है कि सरकार की मंजूरी के बाद ही किताबें बांटी जा रही हैं। किताब राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने तैयार कराई है। कक्षा 11-12 में भाग-1 व भाग-2 के रूप में पिछली कांग्रेस सरकार के समय से पढ़ाई जा रही है।

 

भास्कर पड़ताल में सामने आया कि विभागीय अफसरों और पाठ्यक्रम निर्माण समिति ने पुराने संस्करण को सिर्फ 2025 लगाकर हूबहू प्रिंट करवा लिया गया। ज्यादा बवाल भाग-2 पर है। इसके कवर पर इंदिरा व राजीव गांधी की फोटो हैं।

माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की इसी किताब को लेकर सियासी बवाल मचा हुआ है।

सबसे पहले जानिए – क्या बोले शिक्षा मंत्री मदन दिलावर

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किताब सिर्फ कांग्रेस को महिमामंडित कर रही है। लग रहा है कि जैसे सबकुछ कांग्रेस ने ही किया है। कांग्रेसी पोथी को हम नहीं पढ़ाएंगे। इसमें लोकतंत्र की हत्या करने वालों की गाथाएं हैं। फोटो छोड़िए यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के योगदान का विस्तृत उल्लेख तक नहीं। भैरोंसिंह शेखावत, वसुंधरा राजे का योगदान कहां गया?

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बोर्ड सचिव ने कहा- मंजूरी के बाद ही किताबें छपवाईं

राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के सचिव कैलाश चंद शर्मा का इस मामले पर कहना है कि बोर्ड अपनी किताबों के लिए पहले सरकार से अनुमोदन लेता है। हमने तो मंज़ूरी मिलने पर ही किताबें छपवाई हैं।

वहीं, पुस्तक मंडल के सीईओ मनोज कुमार बोले कि हमारा काम सिर्फ छपाई और वितरण का है। हमें नहीं पता, इनमें क्या छपा है, क्या नहीं।

सचिव कैलाश चंद्र शर्मा का कहना है कि आगे सरकार जैसा भी निर्देश देगी पालना करेंगे।

क्यों मचा किताब पर बवाल?

संयोजक के प्राक्कथन में 80 फीसदी जिक्र राजीव गांधी के योगदान का है। पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी एवं मनमोहन सिंह के अलग-अलग पेजों पर 15 से ज्यादा फोटो लगाए गए हैं। दूसरी ओर, 11 साल से देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक भी फोटो नहीं है।

वहीं, पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी एवं मोदी के योगदान की अन्य प्रधानमंत्रियों की तरह जानकारियां नहीं हैं। सोनिया गांधी, अशोक गहलोत का भी फोटो है। इस पर पूर्व शिक्षामंत्री कालीचरण सराफ ने कहा है कि ऐसी किताब हमें बर्दाश्त नहीं।

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