सीकर में श्रमिक संगठनों का प्रदर्शन : ऑटो, ई-रिक्शा और ठेले बंद रहे, रोडवेज कर्मचारियों ने दी आंदोलन की चेतावनी

रामगढ़ में शाम 4:30 बजे से आधा घंटा तक कभी हल्की तो कभी भारी बारिश हुई जिससे मौसम सुहावना हो गया

सीकर में 9 जुलाई को श्रमिक संगठनों की एक दिवसीय हड़ताल ने बीजेपी सरकार निशाना साधा। सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस (सीटू) के नेतृत्व में विभिन्न श्रमिक संगठनों ने केंद्र और राज्य की बीजेपी सरकार की श्रमिक विरोधी नीतियों के खिलाफ हड़ताल का ऐलान किया। हड़ताल में ऑटो, ई-रिक्शा और हाथ ठेले बंद रहे। संगठनों ने कलेक्ट्रेट पर विरोध-प्रदर्शन किया। सीटू के जिला महामंत्री बृजसुंदर जांगिड़ ने बीजेपी सरकार पर श्रमिकों के हितों की अनदेखी और पूंजीपतियों को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि श्रम कानूनों में बदलाव और बढ़ती महंगाई ने मजदूरों का जीना मुहाल कर दिया है।

कलेक्ट्रेट के बाहर विरोध-प्रदर्शन करते हुए प्रदर्शनकारी। श्रमिकों ने प्रधानमंत्री के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा।

कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा ऑटो ई-रिक्शा रिक्शा चालक यूनियन सीटू के महामंत्री दिलीप मिश्रा ने बताया कि जिले भर के ऑटो ई-रिक्शा चालक हड़ताल में शामिल हुए। सुबह 11 बजे किशन सिंह ढाका स्मृति भवन पर एकत्रित होकर श्रमिकों ने प्रधानमंत्री के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। जिसमें न्यूनतम मजदूरी, सामाजिक सुरक्षा और स्थानीय मुद्दों को उठाया गया। सीटू ने बीजेपी की नीतियों को मजदूरों के खिलाफ साजिश करार देते हुए आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी।

वहीं, राजस्थान रोडवेज वर्कर्स यूनियन (सीटू) ने बीजेपी सरकार की श्रमिक विरोधी नीतियों के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। यूनियन ने केंद्र और राज्य सरकार पर मजदूरों के हितों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए कई मांगें उठाईं। सीटू के जिला महामंत्री बृजसुंदर जांगिड़ ने कहा कि बीजेपी सरकार की नीतियां पूंजीपतियों को फायदा पहुंचाने वाली हैं, जिससे श्रमिकों का शोषण बढ़ा है।

शहर में आक्रोश रैली निकालते हुए प्रदर्शनकारी।

बार-बार इन मांगों को नजरअंदाज किया रोडवेज कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के अनुसार वेतन और पेंशन में संशोधन, 5 हजार रिटायर्ड कर्मचारियों के लिए एकमुश्त पेंशन फायदा, चार साल से लंबित एक्स-ग्रेशिया भुगतान, 9 हजार रिक्त पदों पर भर्ती, और 1500 नई बसों की खरीद शामिल हैं। यूनियन ने आरोप लगाया कि बीजेपी सरकार ने बार-बार इन मांगों को नजरअंदाज किया, जिससे कर्मचारियों में आक्रोश है।

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