श्री क्षत्रिय युवक संघ के संरक्षक का निधन : भगवान सिंह का समाज सेवा और संगठन निर्माण में रहा महत्वपूर्ण योगदान

फतेहपुर में श्री क्षत्रिय युवक संघ के संरक्षक भगवान सिंह रोलसाहबसर का निधन हो गया है। रोलसाहबसर बीते कुछ दिनों से हॉस्पिटल में भर्ती थे। उनकी किडनी सहित अन्य ऑर्गन वीक होने की वजह से वे वेटिलेंटर पर थे।

भगवान सिंह का जन्म 2 फरवरी 1944 को सीकर जिले की फतेहपुर तहसील के रोल साहबसार गांव में हुआ। वे स्वर्गीय मेघसिंह और गोम कंवर की पांचवीं संतान थे। उनके जन्म से पहले ही पिता का देहांत हो गया था। उन्होंने 1960 में चमड़ियां कॉलेज, फतेहपुर से मैट्रिक किया। फिर रुईया कॉलेज, रामगढ़ शेखावाटी से प्री-यूनिवर्सिटी की पढ़ाई पूरी की। 1961 में चूरू के लोहिया कॉलेज में दाखिला लिया।

उनका संघ से जुड़ाव 1963 में रतनगढ़ के एक प्रशिक्षण शिविर से शुरू हुआ। वे जयपुर के राजपूत छात्रावास में शाखा प्रमुख रहे। 1964-65 में पूज्य तनसिंह जी के साथ दिल्ली में रहे। 1967 में सिवाना (बाड़मेर) में व्यवसाय शुरू किया। यहीं ठाकुर तेजसिंह जी की बेटी से उनका विवाह हुआ।

श्री क्षत्रिय युवक संघ के चतुर्थ संघ प्रमुख के रूप में उन्होंने समाज सेवा और संगठन निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया। कठिन परिस्थितियों में भी उन्होंने शिक्षा और समाज सेवा का मार्ग नहीं छोड़ा।

संघ प्रमुख का दायित्व

1979 में पूज्य तनसिंह जी और 1989 में पूज्य नारायण सिंह जी के देहावसान के बाद भगवान सिंह पर संघ प्रमुख का दायित्व आया। उन्होंने राजस्थान से गुजरात तक स्वयंसेवकों से व्यक्तिगत संपर्क साधा और प्रशिक्षण शिविरों व शाखाओं की संख्या में अभूतपूर्व वृद्धि की. 22 दिसंबर 1996 को संघ की स्वर्ण जयंती पर इसके वृहद स्वरूप को दुनिया के सामने प्रस्तुत किया।

महिलाओं और परिवारों तक विस्तार

उनके नेतृत्व में संघ का दायरा पुरुषों तक सीमित न रहकर महिलाओं और बालिकाओं तक पहुंचा. बालिका प्रशिक्षण शिविर और दंपती शिविर शुरू हुए. जयपुर, जोधपुर, बाड़मेर, बीकानेर, जैसलमेर, कुचामन और गुजरात के सुरेंद्रनगर में स्थायी कार्यालय स्थापित किए गए। बाड़मेर में ‘आलोक आश्रम’ के रूप में आदर्श शिविर स्थल विकसित हुआ। सीकर में ‘श्री दुर्गा महिला विकास संस्थान’ के जरिए बालिका शिक्षा को बढ़ावा दिया गया।

राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार

संघ का प्रभाव राजस्थान और गुजरात से निकलकर महाराष्ट्र, दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और दक्षिण भारत तक फैला। जून 2020 तक भगवान सिंह 330 शिविरों में सक्रिय रूप से शामिल हो चुके हैं। समाज की अपेक्षाओं को समझते हुए उन्होंने ‘श्री प्रताप फाउंडेशन’ के माध्यम से सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर लोगों को जोड़ने का कार्य शुरू किया। संघ प्रमुख के रूप में भगवान सिंह रोलसाहबसर ने न केवल संगठन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया, बल्कि समाज सेवा और सामाजिक एकता के लिए एक प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत किया. उनका जीवन लाखों स्वयंसेवकों और समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत बना हुआ है।