गयाजी/कोलकाता । शेखावाटी टुडे परिवार के ज्योतिषाचार्य एवं भागवाताचार्य पंडित विनोद मुद्गल ने अपने यजमान नीमकाथाना के चेतानी परिवार के श्री कपिल कुमार अग्रवाल व उनकी धर्मपत्नी (वर्तमान में कोलकाता प्रवासी) से गया जी में श्राद्ध एवं पिंडदान संस्कार करवाया।
पंडित मुद्गल ने बताया कि गया जी में पिंडदान का विशेष महत्व शास्त्रों में वर्णित है। इसी परंपरा का निर्वहन करते हुए यजमान से आठवें दिन विष्णुपद मंदिर प्रांगण में विधि-विधानपूर्वक पितरों का तर्पण व श्राद्ध कार्य सम्पन्न कराया गया।
उन्होंने बताया कि इस अवसर पर स्वयं को भी सौभाग्य प्राप्त हुआ क्योंकि उनके पिताश्री स्व. श्री शंकर लाल जी का श्राद्ध तिथि होने से वे अपने पितरों का तर्पण गया जी में कर सके।
पंडित मुद्गल प्रतिदिन शेखावाटी टुडे के पाठकों को पंचांग व राशिफल प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि गया जी में किया गया पिंडदान न केवल पितरों की आत्मा की शांति के लिए महत्वपूर्ण है बल्कि परिवार की समृद्धि और कल्याण के लिए भी अत्यंत फलदायी माना गया है। पं. मुद्गल ने बताया
गयाजी में श्राद्ध मुख्य रूप से पितृ पक्ष के दौरान किया जाता है, जो 16 दिनों तक चलता है। हालांकि, कुछ लोग अपनी सुविधानुसार 1, 3, 7 या 17 दिनों में भी श्राद्ध कर्म पूरा कर सकते हैं। यह माना जाता है कि पूरे वर्ष के 365 दिन भी पिंडदान का महत्व है।
गयाजी में श्राद्ध के मुख्य स्थान:
* फल्गु नदी का तट: फल्गु नदी के किनारे पिंडदान के बिना श्राद्ध अधूरा माना जाता है।
* विष्णुपद मंदिर: यहां भगवान विष्णु के चरण चिह्न हैं और यह श्राद्ध के लिए सबसे महत्वपूर्ण स्थानों में से एक है।
* अक्षयवट: यह एक बरगद का पेड़ है, जहाँ पिंडदान और तर्पण किया जाता है।
* प्रेतशिला पर्वत: अकाल मृत्यु वाले पितरों का श्राद्ध और पिंडदान यहाँ किया जाता है।
* ब्रह्म सरोवर, सूर्यकुंड और वैतरणी सरोवर: इन सरोवरों में भी तर्पण और पिंडदान का विशेष महत्व है।
कहा जाता है कि गयाजी में 54 वेदी स्थल और 8 सरोवर हैं, जहाँ पिंडदान और तर्पण का विधान है। इनमें से विष्णुपद मंदिर, फल्गु नदी और अक्षयवट प्रमुख हैं।
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