झुंझुनूं: महाराष्ट्र पुलिस की एंटी नारकोटिक्स सेल (एएनसी) ने जिले के धनूरी थाना इलाके के नांद का बास गांव में एमडी ड्रग्स बनाने की फैक्ट्री पकड़ी है। यहां से ड्रग्स, केमिकल व उपकरणों समेत 100 करोड़ की सामग्री जब्त की है। यह फैक्ट्री पूर्व सरपंच पति सुरेश सिहाग का भतीजा अनिल सिहाग (31) चला रहा था। उसे एक किलो एमडी ड्रग्स की सप्लाई देते समय सीकर से पकड़ा।
महाराष्ट्र के पुलिस कमिश्नर निकेत कौशिक के मुताबिक 4 अक्टूबर को एएनसी ने ड्रग्स के मामले में भयंदर में एक कार्रवाई के दौरान छह को पकड़ा था। उनसे पूछताछ में झुंझुनूं में एमडी ड्रग्स बनाने का इनपुट मिला था। इस आधार पर टीम सीकर पहुंची। 13 दिसंबर को बोगस ग्राहक से अनिल को फोन करवाया गया। तब अनिल ने अगले दिन सुबह सीकर आने को कहा। 14 दिसंबर को वह 1 किलो एमडी ड्रग लेकर सीकर पहुंचा। सुबह 6:30 बजे सीकर में कलेक्ट्रेट के सामने स्थित मिलन होटल पर उसे दबोच लिया। अनिल ने पूछताछ में बताया कि उसने 15 दिन पहले ही इस फैक्ट्री में काम शुरू किया था। उसके साथी ने उससे 50 हजार रुपए किराए पर ये फैक्ट्री ली थी। उसके दोस्त नेतड़वास सीकर निवासी बिज्जू उर्फ जग्गा ने एमडी ड्रग्स बनाने के लिए जगह उपलब्ध कराने का लालच दिया। बिज्जू ने कहा कि एमडी बनाने में काफी स्मेल आती है, इसलिए उसे सुनसान जगह चाहिए और वह अच्छा किराया देगा।
अनिल ने पहले तो मना कर दिया, लेकिन लालच में आकर तैयार हो गया। 20 नवंबर को बिज्जू ने अनिल को केवल 3 दिन के लिए उसके चाचा के मुर्गी फार्म पर जगह देने के लिए राजी कर लिया। इसके बदले 50 हजार रुपए देने का वादा किया गया। 26 नवंबर को बिज्जू हरियणाा नंबर वाली कार में एमडी बनाने का सामान लेकर मुर्गी फार्म पर आया। मुर्गियों के दाने रखने वाले खाली कमरे में काम शुरू किया। इससे पहले अनिल सादुलपुर में डोडा-चूरा तस्करी में गिरफ्तार हो चुका। वह लगभग 19 दिन तक जेल में रहा था। तब से वह इस कारोबार में लिप्त था। अनिल ने पूछताछ में नेतड़वास सीकर निवासी बिज्जू उर्फ जग्गा का नाम लिया। तब अनिल के फोन से बिज्जू को वॉट्सएप कॉल कर सीकर में जयपुर रोड पर बुलाया। वहां बिज्जू आ गया। लेकिन उसे पकड़ने की कोशिश की तो वह कार को तेज गति से भगाकर वहां से भाग गया। इसके बाद एएनसी टीम अनिल को लेकर उसके गांव नांद का बास पहुंची। यहां एमडी व ड्रग्स बनाने का सामान मिल गया। झुंझुनूं पुलिस फेल : महाराष्ट्र पुलिस की कार्रवाई ने झुंझुनूं पुलिस की विफलता को उजागर कर दिया। दरअसल धनूरी थाना इलाके में नशे के कारोबार की फैक्ट्री का संचालित होना और झुंझुनूं पुलिस को इसकी भनक नहीं लगना स्थानीय पुलिस की विफलता है। आरोपी डोडा पोस्त चूरे की तस्करी में पहले भी शामिल रह चुके हैं। फिर भी स्थानीय पुलिस का इन पर ध्यान नहीं देना बड़ी चूक है। अनिल सिहाग 12 वीं पास है और खेतीबाड़ी करता है।
अनिल 2016-17 में अपने चाचा सुरेश सिहाग के मुर्गी फार्म में काम करता था। इसी दौरान वह अपने दोस्त बाजला निवासी सुभाष के संपर्क में आया। सुभाष अपनी कार से नीमच से डोडा पोस्त लाता था। वह अनिल को भी साथ ले जाने लगा। अनिल ने सुभाष के साथ 5-7 चक्कर लगाए। उसे प्रति चक्कर 5 हजार रुपए मिलते थे। वे डोडा पोस्ट को बगड़ रोड पर होटल और ढाबों पर सप्लाई करते थे। इसके बाद अनिल ने नीमच में हाइवे के एक ढाबा मालिक पप्पू गुर्जर से संपर्क बनाया और स्वयं डोडा पोस्त लाना शुरू कर दिया। तारानगर में अपने जानकार विकास को बेचता था। उसे प्रति किलो 500 से 700 रुपए की कमाई होती थी। इस धंधे के दौरान एक बार सादुलपुर (चूरू) में उसकी कार को रुकवा लिया गया, लेकिन वह भागने में सफल रहा।






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