शिक्षा विभाग ने विद्यार्थियों के लिए इस सत्र में बड़ा बदलाव करते हुए अर्द्धवार्षिक परीक्षा की तिथियों को आगे बढ़ा दिया है। अब ये परीक्षाएं 20 नवंबर से 2 दिसंबर तक होंगी। पहले परीक्षा 12 से 24 दिसंबर तक प्रस्तावित थीं। विभाग ने शिविरा पंचांग में संशोधन करते हुए नई तिथियां तय करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। जल्द ही संशोधित पंचांग जारी किया जाएगा।
झुंझुनूं सहित 41 जिलों में पहली बार नया ढांचा
इस बार राज्य में नए जिलों के गठन के बाद पहली बार परीक्षा का आयोजन 41 जिलों के आधार पर किया जाएगा। पहले यह परीक्षा योजना 33 जिलों पर आधारित थी। अब झुंझुनूं सहित सभी नए जिलों का डेटा शाला दर्पण पोर्टल पर अपडेट किया जा चुका है।
शिक्षा विभाग के मुताबिक, नए जिलों के गठन से राज्य समान परीक्षा योजना को और मजबूत किया जाएगा। इससे सभी जिलों में परीक्षा प्रबंधन, मूल्यांकन और परिणाम प्रक्रिया एकसमान ढंग से हो सकेगी।
डीईओ (माध्यमिक) राजेश मील ने बताया कि “जिले के स्कूलों में विद्यार्थियों का दूसरा टेस्ट चल रहा है और अर्द्धवार्षिक परीक्षा से पहले सिलेबस पूरा कर लिया जाएगा। परीक्षा 20 नवंबर से शुरू होगी और सभी तैयारियां लगभग पूरी हैं। शिविरा पंचांग में संशोधन के आदेश जल्द जारी होंगे।”
वार्षिक परीक्षाएं मार्च तक, 1 अप्रैल से नया सत्र
शिक्षा विभाग ने वार्षिक परीक्षा कार्यक्रम भी पहले से तय कर दिया है। लक्ष्य है कि 6वीं से 12वीं तक की वार्षिक परीक्षाएं 10 से 25 मार्च तक पूरी कर ली जाएं और 31 मार्च तक परिणाम घोषित कर दिए जाएं।
माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की 10वीं और 12वीं की परीक्षाएं 12 फरवरी से 12 मार्च तक प्रस्तावित हैं, जबकि 5वीं और 8वीं बोर्ड परीक्षाएं 20 मार्च तक पूरी की जाएंगी। विभाग की योजना है कि 1 अप्रैल से नए सत्र 2025-26 की शुरुआत कर दी जाए, ताकि विद्यार्थियों को समय पर नई कक्षाओं में प्रवेश मिल सके।
प्रश्न-पत्र छपाई से पहले होगा सटीक वेरिफिकेशन
शिक्षा विभाग ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि परीक्षा की तैयारी से पहले विद्यार्थियों की सटीक संख्या का वेरिफिकेशन किया जाए। प्रत्येक स्कूल को कक्षा और विषयवार विद्यार्थियों की जानकारी शाला दर्पण पोर्टल पर अपडेट करनी होगी।
झुंझुनूं जिले में भी यह प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। सभी ब्लॉकों—झुंझुनूं, सूरजगढ़, नवलगढ़, बगड़, बिसाऊ, उदयपुरवाटी और मंड्रेला क्षेत्र के विद्यालयों में विद्यार्थियों का सत्यापन चल रहा है। डीईओ कार्यालय की टीम इस कार्य की निगरानी कर रही है ताकि परीक्षा से पहले सभी आंकड़े सटीक रूप से अपडेट हो जाएं।
समान मूल्यांकन प्रणाली को और मजबूती
राज्य समान परीक्षा योजना के तहत पूरे प्रदेश में एक समान प्रश्न-पत्र और मूल्यांकन पद्धति लागू की गई है। नए जिलों के गठन के बाद अब यह व्यवस्था और अधिक पारदर्शी होगी। इससे राज्यभर में शिक्षा की गुणवत्ता का तुलनात्मक मूल्यांकन करना संभव होगा।
विभागीय अधिकारियों के अनुसार, समान परीक्षा प्रणाली से विद्यार्थियों के प्रदर्शन का आकलन एकसमान पैमाने पर हो सकेगा। पिछले कुछ वर्षों में इस व्यवस्था से परीक्षाओं की पारदर्शिता और विश्वसनीयता में सुधार आया है।
समयबद्ध सत्र के लिए सख्त निगरानी
शिक्षा विभाग का फोकस इस बार सत्र को समय पर पूरा कराने पर है। मार्च तक परीक्षा और परिणाम जारी होने से विद्यालयों को 1 अप्रैल से नए सत्र की तैयारियां शुरू करने का पर्याप्त समय मिलेगा। इससे शिक्षकों को भी विद्यार्थियों की कमजोरियों का मूल्यांकन कर सुधारात्मक कदम उठाने का अवसर मिलेगा।






Leave a Reply