रामगढ़ में तीज मेले की पुरानी रौनक हुई गुम, पार्क और पानी भराव बनी नई चुनौती

रामगढ़ शेखावाटी (26 जुलाई):
श्रावण मास में महिलाओं के प्रमुख पर्व हरियाली तीज का उत्सव भले ही पूरे हर्षोल्लास से मनाया जा रहा हो, लेकिन रामगढ़ में इस पर्व से जुड़ी एक ऐतिहासिक परंपरा अब दम तोड़ती नजर आ रही है। कभी क्षेत्रभर में प्रसिद्ध रहा तीज का विशाल मेला अब बीते दिनों की बात बन चुका है।
 
वर्षों पहले यह मेला श्रीकृष्ण गौशाला के सामने स्थित सेठ अनंतराम पोद्दार के जोहड़े के पायतन में भरता था, जिसे स्थानीय लोग आज भी “तीज वाला जोहड़ा” नाम से जानते हैं। तब यह मैदान सैकड़ों दुकानों, झूलों और रंग-बिरंगी सजावटों से सजा होता था, और हजारों की संख्या में महिलाएं, बच्चे व पुरुष इसमें भाग लेते थे।
जोहड़े के स्वच्छ पानी में बच्चे और युवा तैराकी का आनंद लिया करते थे, जो मेले का एक मुख्य आकर्षण हुआ करता था।
 
✍️ बदलते समय के साथ बढ़ती उपेक्षा
 
लेकिन पिछले कई दशकों से इस परंपरा पर प्रशासनिक उपेक्षा, राजनीतिक निष्क्रियता और सामाजिक चेतना के अभाव की गहरी छाया पड़ गई है। अब जोहड़ा गंदगी, कीचड़ और जलभराव से जूझ रहा है। इसके कारण वहां मेले का आयोजन अब असंभव हो चुका है।
 
मेला अब खानापूर्ति बनकर, गौशाला के पास सड़क किनारे एक छोटे से खाली स्थान पर सिमट कर रह गया है। कुछ जागरूक नागरिकों ने समय-समय पर आवाज़ उठाई, लेकिन उनकी बातें अनसुनी रहीं।
 
🏞 अमृत योजना के पार्क ने बढ़ाई समस्याएं
 
हाल ही में अमृत योजना के अंतर्गत जोहड़े के पायतन में करोड़ों की लागत से एक पार्क का निर्माण किया गया है। हालांकि यह योजना सौंदर्यीकरण की दृष्टि से सकारात्मक मानी जा सकती है, लेकिन बरसाती पानी की निकासी की समुचित व्यवस्था न होने से अब पार्क के आस-पास का क्षेत्र जलभराव की नई समस्या से जूझ रहा है।
 
विद्युत विभाग के सहायक अभियंता कार्यालय तक पानी भर जाने की घटनाएं सामने आई हैं, जिससे कार्यालयीन कार्य प्रभावित हुए हैं। क्षेत्रवासियों का कहना है कि कई बार फाइलें तक पानी में भीग चुकी हैं।
 
🚧 समाधान की राह और स्थानीय विरोध
 
नगरपालिका प्रशासन ने इस समस्या से निपटने के लिए एक डेम निर्माण की योजना बनाई थी, लेकिन स्थानीय नागरिकों के विरोध के चलते यह प्रस्ताव अब तक धरातल पर नहीं उतर पाया है। प्रशासन और नागरिकों के बीच समन्वय की कमी समाधान में सबसे बड़ी बाधा बनकर उभरी है।
 
📣 जनता की अपील
 
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह मेला सिर्फ एक आयोजन नहीं, रामगढ़ की सांस्कृतिक पहचान था। वे प्रशासन से अपील करते हैं कि वह इस क्षेत्र के सांस्कृतिक और सामाजिक महत्व को समझे और एक ठोस कार्ययोजना बनाकर पुराने तीज मेले की परंपरा को फिर से जीवंत करे।
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