भाभी का मर्डर करने वाला तीसरा आरोपी गिरफ्तार : नेवी कमांडर देवर, उसकी पत्नी पहले ही अरेस्ट; जमीन विवाद में की थी हत्या

भाभी का मर्डर करने वाला तीसरा आरोपी गिरफ्तार : नेवी कमांडर देवर, उसकी पत्नी पहले ही अरेस्ट; जमीन विवाद में की थी हत्या

झुंझुनूं जिले के सूरजगढ़ थाना इलाके के गांव स्यालू खुर्द में भाभी की हत्या मामले में पुलिस ने तीसरे और मुख्य आरोपी देवर दाताराम को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस इस मामले में नेवी कमांडर महेंद्र सिंह भालोठिया (देवर) और उसकी पत्नी सुशीला (भाभी) को गिरफ्तार कर चुकी है। आरोपियों ने महिला पर 28 अप्रैल को जमीन विवाद को लेकर हमला किया गया था।

सूरजगढ़ थाना इंचार्ज हेमराज मीणा ने बताया- दाताराम घटना का मुख्य आरोपी है। उससे गहन पूछताछ के बाद शुक्रवार को उसे गिरफ्तार कर लिया गया। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि हमले के दौरान महिला के सिर पर दाताराम ने ही वार किया था। इससे उसकी हालत गंभीर हो गई थी। नेवी कमांडर महेंद्र से पूछताछ जारी है। सुशीला को जेल भेज दिया है।

क्या है पूरा मामला

सूरजगढ़ थाने में दर्ज रिपोर्ट के अनुसार- स्यालू गांव निवासी निहालसिंह और उनकी पत्नी संतोष पर 28 अप्रैल को जानलेवा हमला किया गया। 28 अप्रैल की सुबह 10:10 बजे निहाल सिंह अपने घर पर था। इस दौरान उसका भाई महेंद्र सिंह (भारतीय नौसेना में कमांडर), उसकी पत्नी सुशीला, बेटा पवन, भाई दाताराम और उसकी पत्नी इंद्रा हथियारों से लैस होकर घर में घुसे।

महेंद्र के पास सर्विस रिवॉल्वर थी। वह घर के चौक में आया और निहाल की पत्नी संतोष से गाली-गलौज करने लगा। उसने संतोष के साथ मारपीट की। इस दौरान निहाल सिंह के भाई दाताराम ने अपनी भाभी संतोष के सिर पर किसी चीज से गंभीर वार किया। इससे वह घायल हो गई। उसे जयपुर के एसएमएस हॉस्पिटल भिजवाया गया। जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। 29 अप्रैल को निहाल ने एसएमएस अस्पताल जयपुर में रिपोर्ट दर्ज कराई थी।

हत्या का कारण पारिवारिक और जमीन विवाद

पुलिस के अनुसार- जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि यह हमला पारिवारिक विवाद और संपत्ति को लेकर आपसी रंजिश का परिणाम था। आरोपी पक्ष ने योजना बनाकर हमले को अंजाम दिया और पूरे परिवार को निशाना बनाया। पुलिस अन्य आरोपियों की भूमिका की भी जांच कर रही है।

वीडियो में कैद हुई थी मारपीट

इस हमले का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें मारपीट साफ तौर पर देखी जा सकती है। वीडियो में आरोपियों को हथियारों के साथ पीड़ित परिवार पर हमला करते देखा गया। इससे पुलिस को जांच में मदद मिली और आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी में तेजी आई।

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