खाटूश्यामजी मंदिर में रविवार को श्याम भक्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। कलयुग के अवतारी, तीन बाण धारी और हारे का सहारा कहे जाने वाले बाबा श्याम के दरबार में श्रद्धालुओं का रेला निर्जला एकादशी के बाद से लगातार जारी है। पिछले 20 दिनों में करीब 20 लाख से अधिक भक्त बाबा के दर्शन कर चुके हैं।
आस्था और श्रद्धा का ऐसा अनुपम केंद्र आज के दौर में कहीं और देखने को मिलना मुश्किल है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, खाटूश्यामजी में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या राजस्थान के किसी अन्य मंदिर से कहीं अधिक है, जिससे यह धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में अपार संभावनाओं वाला केंद्र बन गया है।
खाटूश्यामजी में रविवार को सुबह से ही भक्तों का तांता लगा रहा। रींगस से खाटू धाम तक केसरिया निशान लिए श्याम प्रेमी ‘जय श्री श्याम’ के जयकारों के साथ दरबार की ओर बढ़ते नजर आए। हल्की बारिश और तापमान में गिरावट ने भी भक्तों का उत्साह दोगुना कर दिया। भीषण गर्मी के बाद मौसम की यह मेहरबानी श्याम भक्तों के लिए किसी वरदान से कम नहीं। मंदिर परिसर में भक्तों की कतारें और जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो उठा।
श्री श्याम मंदिर कमेटी ने भक्तों की सुविधा के लिए व्यापक इंतजाम किए हैं। छाया, पेयजल, कारपेट, मेडिकल सुविधाएं और सुरक्षा व्यवस्था को सुनिश्चित किया गया है। मंदिर कमेटी के व्यवस्थापक संतोष कुमार शर्मा ने भक्तों से सहयोग की अपील की, ताकि दर्शन सुगम और सुरक्षित रहें। पुलिस प्रशासन भी पूरी तरह मुस्तैद है। सुरक्षाकर्मियों की तैनाती के साथ ट्रैफिक और भीड़ प्रबंधन के लिए कड़े इंतजाम किए गए हैं। मंडा रोड और हनुमानपुरा मोड़ पर जाम की स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिसकर्मी दिन-रात जुटे हैं।
खाटूश्यामजी न केवल आस्था का केंद्र है, बल्कि धार्मिक पर्यटन के लिहाज से भी महत्वपूर्ण स्थल बन चुका है। भारत सरकार की ‘स्वदेश दर्शन योजना 2.0’ के तहत खाटू नगरी में विकास कार्यों के लिए पहली किस्त जारी हो चुकी है, जिससे मंदिर परिसर और आस-पास के क्षेत्रों का और विकास होगा। यहाँ की अपार संभावनाएं इसे देश के प्रमुख धार्मिक पर्यटन स्थलों में शुमार कर रही हैं।
निर्जला एकादशी के बाद से बाबा श्याम के दरबार में भक्तों की भीड़ लगातार बढ़ रही है। रविवार को मंदिर परिसर सतरंगी फूलों से सजा नजर आया, जिसने दर्शन को और भव्य बना दिया। भक्तों का कहना है कि बाबा की एक झलक पाने के लिए घंटों कतार में खड़े रहना भी सार्थक लगता है। खाटूश्यामजी का यह माहौल न केवल आध्यात्मिक शांति देता है, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक एकता का भी प्रतीक है।


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