सीकर की विशेष भ्रष्टाचार निवारण कोर्ट ने पशुपालन विभाग के संयुक्त निदेशक दीपक अग्रवाल की जमानत याचिका खारिज कर दी है। एसीबी ने 31 मई को सयुंक्त निदेशक को 25 हजार रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया था।
सहायक निदेशक अभियोजन सुरेंद्र सिंह ने बताया- एक साल पहले धोद के वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी दीपक अग्रवाल ने कथित तौर पर राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल कर सीकर में संयुक्त निदेशक के पद पर नियुक्ति हासिल की थी। इसके बाद से वे कर्मचारियों से मासिक बंधी के नाम पर अवैध वसूली कर रहे थे। विरोध करने वालों को ट्रांसफर की धमकी देकर दबाव बनाया जाता था।
आरोपी फील्ड ड्यूटी पर गए कर्मचारियों को अनुपस्थित दिखाकर कारण बताओ नोटिस जारी करता और उनका वेतन रोक लेता था। बाद में वेतन जारी करने के नाम पर रिश्वत की मांग करता। अब तक 100 से अधिक कर्मचारियों से इस तरह वसूली की जा चुकी है। हाल ही में अग्रवाल ने 25 कर्मचारियों का सीमावर्ती इलाकों में ट्रांसफर करवाया, जिसके बाद एक कर्मचारी ने ACB में शिकायत दर्ज की।
शिकायत के बाद ACB ने सत्यापन किया और सुख सागर अपार्टमेंट की पार्किंग में दीपक अग्रवाल को 25 हजार रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा। शिकायतकर्ता से 5 महीने की बंधी के नाम पर 50 हजार रुपए की मांग की गई थी। जज अखिलेश कुमार ने जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा- भ्रष्टाचार कैंसर की तरह समाज को खोखला कर रहा है। उच्च अधिकारी द्वारा मासिक बंधी मांगना रंगदारी जैसा है। कोर्ट ने माना कि आरोपी के बाहर आने पर जांच प्रभावित हो सकती है। ट्रांसक्रिप्ट में रिश्वत मांगने और लेने के सबूत मौजूद हैं, जिसके आधार पर जमानत खारिज की गई।

कोर्ट ने कहा- कैंसर की तरह खोखला कर रहा भ्रष्टाचार : सीकर में रिश्वतखोर पशुपालन संयुक्त निदेशक की जमानत याचिका खारिज, 25 हजार की रिश्वत लेते पकड़ा था
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