रामगढ़ शेखावाटी: अपने शानदार भवन व दुर्लभ पुस्तकों के संग्रह के कारण पूरे देश भर में विख्यात श्री नवज्योति पुस्तकालय की व्यवस्था सुधारने के लिए कस्बे के जागरूक सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा भरसक प्रयास करने के बावजूद कथित रूप से ट्रस्टी व प्रबंध समिति के पदाधिकारी बनकर बैठे लोगों के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी तो हार कर कस्बे के सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जनहित याचिका के द्वारा फतेहपुर के अतिरिक्त सेशन न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। याचिका में मुख्य रूप से वर्ष 2023 में कतिपय स्वार्थी तत्वों द्वारा अनधिकृत रूप से बनाई गई ट्रस्ट डीड को रद्द करने के अलावा पुस्तकालय की व्यवस्था सुधारने के लिए निवेदन किया गया है। कस्बे के सामाजिक कार्यकर्ता गोपीचंद व्यास, नंदकिशोर मिश्रा एवं संजय शर्मा की ओर से दायर जनहित याचिका में रामगढ़ के तहसीलदार सहित एक दर्जन से अधिक लोगों के खिलाफ वाद प्रस्तुत किया गया है।
वर्षों से पुस्तकालय है अव्यवस्था का शिकार
उल्लेखनीय है कि कस्बे में स्थित एक शताब्दी से भी पुराने इस विख्यात एवं ऐतिहासिक पुस्तकालय पिछले काफी वर्षों से अव्यवस्था का शिकार है। न तो पुस्तकालय निर्धारित समय पर खुल रहा है और न ही जनता को पुस्तकालय की पुस्तकों का लाभ मिल रहा है। विधिवत रूप से निर्वाचित प्रबंध समिति भी नहीं है। सीकर के सहायक पंजीयक, सोसायटीज की माने तो वर्ष 1962 के बाद से उनके पास विधिवत चुनाव व हिसाब-किताब की सूचना नहीं है। फिर भी चंद व्यक्तियों के परिवार के सदस्य पीढ़ी दर पीढ़ी इसके स्वयं भू पदाधिकारी व ट्रस्टी बनते रहे। लोगों का आरोप है कि पुस्तकालय की काफी दुर्लभ व बहुमूल्य पुस्तकों व पांडुलिपियों को खुर्दबुर्द किया जा चुका है। वर्ष 2014 में इनके द्वारा एक तथाकथित फर्जी चुनाव भी कराया गया था जिसमें कथित रूप से चुने गए व्यक्ति व उनके परिवार के लोग आज भी पदाधिकारी बने बैठे हैं। इस चुनाव को फतेहपुर के सिविल न्यायालय में चुनौती भी दी गई थी लेकिन बाद में पक्षकारों की मृत्यु होने से यह अनिर्णित ही बंद कर दिया गया। मजे की बात तो यह है कि इस चुनाव में नंदकिशोर मिश्रा द्वारा चुनाव लडऩा दिखाया गया है जबकि मिश्रा का कहना है कि उन्होंने कभी भी पुस्तकालय के चुनाव में हिस्सा नहीं लिया।
1958 से सोयायटी के रूप में संचालित, 2023 में बना ली ट्रस्ट डीड
पुस्तकालय को वर्ष 1958 में सोसायटी एक्ट के तहत पंजीकृत करवाया गया था जो आज भी प्रभावी है। लेकिन कुछ स्वार्थी लोगों ने पुस्तकालय की सम्पति को खुर्दबुर्द करने के उद्देश्य से वर्ष 2023 में सोसायटी को भंग किए बिना ही ट्रस्ट डीड बना कर फर्जी तरीके से रामगढ़ तहसीलदार से पंजीकरण करा लिया। आश्चर्य की बात यह है कि तत्कालीन तहसीलदार ने आंख मूंद कर व नियमों को ताक पर रखकर इस ट्रस्ट डीड का पंजीकरण कर दिया। चौंकाने वाली बात तो यह है कि इस ट्रस्ट डीड में मरे हुए लोग भी ट्रस्टी व पदाधिकारी बने बैठे हैं। विधि विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रकार ट्रस्ट डीड बनाना एक आपराधिक कृत्य है जिसके लिए अलग से आपराधिक मुकदमा दर्ज कराया जा सकता है।
इसी माह में जारी होंगे समन
न्यायालय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सोमवार को मामला न्यायालय के समक्ष पेश किया गया है। सिविल प्रक्रियनुसार सभी प्रतिवादी पक्षकारों को इसी माह के अंत तक समन जारी कर दिये जायेंगे। अब देखना यह है कि न्यायालय द्वारा रामगढ़ की जनता को कब तक और कैसा न्याय दिलाया जायेगा। क्या पुस्तकालय इन लोगों के चंगुल से मुक्त होकर वापिस अपने पूर्व गरिमामय स्वरूप में लौटकर सुचारू रूप से चल पायेगा?

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