
रामगढ़ शेखावाटी/फतेहपुर शेखावाटी: रामगढ़ शेखावाटी के हबीब भाटी को फतेहपुर के अपर सेशन न्यायाधीश विकास ऐचरा की अदालत ने 17 मई 2025 को सुनाये गए अपने फैसले में हिंदू देवी-देवताओं पर अश्लील पोस्ट करने के आरोप में दोषी पाये जाने पर दो साल का साधारण कारवास एवं 10 हजार रूपये के अर्थदंड से दंडित किया है।
क्या था मामला
रामगढ़ शेखावाटी के वार्ड 26 झगड़ा मस्जिद के पास रहने वाला हबीब भाटी पुत्र अलाउद्दीन अपनी फेसबुक आईडी पर हिंदू देवी-देवताओं पर अश्लील व अपानजनक पेास्ट डालता था। जिससे आहत होकर रोहिताश ने 21 सितम्बर 2021 को उसके खिलाफ रामगढ़ पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी। साक्ष्यों के आधार पर रामगढ़ पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया जहा से न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया था। हालांकि बाद में उसे जमानत पर रिहा कर दिया गया था। उसके खिलाफ भारतीय दंड संहित की धारा 295ए, 298 व आईटी एक्ट की धारा 66एफ के तहत फतेहपर के अपर सेशन न्यायालय में मुकदमा चला। हालांकि चार्ज बहस में उसे भादस की धारा 298 के आरोप से उन्मोचित कर दिया। अ्रायल के दौरान अभियोजन पक्ष द्वारा जांच अधिकारी उमाशंकर, उदयसिंह सहित दस गवाहों को पेश किया गया तथा बारह दस्तावेज आदि पेश किये गये। हबीब भाटी ने अपने बचाव में कोई गवाह या साक्ष्य पेश नहीं किए। न्यायालय ने उसे आईटी एक्ट की धारा 66एफ के आरोप से तो बरी कर दिया लेकिन भादस की धारा 295ए के तहत दोषी पाये जाने पर आने 17 मई के फेसले में उसे दो वर्ष के साधारण कारावास एवं 10 हजार रूपये के अर्थ दंड जिसे न चुकाने पर एक माह के अतिरिक्त कारावास से दंडित किया है।
क्या हबीब भाटी को जेल जाना होगा?
हालांकि उसे ट्रायल कॉर्ट द्वारा दंडित किया जा चुका है लेकिन भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (पूर्व में सीआरपीसी) की धारा 430(3) के तहत तीन साल से कम सजा के मामले में सजा सुनाने वाला न्यायालय ही आरोपी को अपील करने की शर्त पर तुरंत जमानत पर छोड़ सकता है और उसे निर्धारित समय में बड़ न्यायालय में अपील दाखिल करके वहां से जमानत लेनी पड़ती है। यह धारा इस प्रकार है-
‘‘धारा 430(3) दोषसिद्धि देने वाले न्यायालय की भूमिका यह उपधारा दोषसिद्ध करने वाले न्यायालय की भूमिका को स्पष्ट करती है। यदि कोई दोषी व्यक्ति यह साबित करता है कि वह अपील दायर करने का इरादा रखता है, तो दोषसिद्ध करने वाला न्यायालय भी निम्नलिखित स्थितियों में उसे सीमित अवधि के लिए जमानत पर रिहा कर सकता है: पहली स्थिति, यदि आरोपी पहले से जमानत पर है और उसे 3 वर्ष या उससे कम की सजा सुनाई गई है। दूसरी स्थिति, यदि दोषसिद्धि जमानती अपराध के लिए है और आरोपी पहले से जमानत पर है। इन दोनों परिस्थितियों में, जब तक अपीलीय न्यायालय से आदेश प्राप्त न हो जाए, तब तक दोषी को सशर्त जमानत पर छोड़ा जा सकता है। और इस अवधि में दोषी की सजा निलंबित मानी जाएगी। यह क्यों महत्वपूर्ण है? यह व्यवस्था इसलिए दी गई है ताकि न्यायालय के आदेश के विरुद्ध अपील करने का वास्तविक अधिकार केवल सैद्धांतिक न रह जाए, बल्कि व्यावहारिक रूप से भी दोषी को समय, सुविधा और स्वतंत्रता मिले कि वह अपील तैयार कर सके और न्याय की तलाश कर सके।’’
इस प्रकार हबीब भाटी को सजा होने के बावजूद भी जेल को आबाद नहीं करना पड़ेगा। उसे कानूनन अपील उच्च न्यायालय या वहां भी हारने पर उच्चतम न्यायालय में अपील करने का अधिकार है।
habib



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