झुंझुनूं शहर के वार्ड नंबर 45 में गुरुवार को बड़ा हादसा होते-होते टल गया। बढ़ के बालाजी के पास स्थित एक जर्जर हवेली अचानक भरभरा कर ढह गई। गनीमत यह रही कि उस वक्त वहां कोई व्यक्ति या वाहन मौजूद नहीं था, वरना हादसा बड़ा रूप ले सकता था। इस पूरी घटना की तस्वीरें नजदीकी घर में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गईं। हवेली गिरते ही आसपास के घरों में जोरदार धमाके जैसी आवाज गूंजी, लोग घरों से बाहर निकल आए और इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। सूचना मिलते ही कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची और हालात का जायजा लिया।
नोटिस दिए, लेकिन कार्रवाई नहीं
इस जर्जर हवेली की स्थिति किसी से छिपी नहीं थी। पड़ोसी लगातार इसकी शिकायत नगर परिषद से करते रहे। खुद नगर परिषद ने हवेली मालिक को आठ बार नोटिस थमाए, लेकिन कार्रवाई सिर्फ कागजों तक सीमित रही। नतीजा यह हुआ कि गुरुवार को हवेली खुद ही ढह गई। सवाल यह है कि जब नगरपालिका ने इसे खतरनाक मानकर बार-बार नोटिस दिए, तो फिर इसे गिराने की कार्रवाई क्यों नहीं की गई? क्या नगर परिषद किसी बड़ी जनहानि का इंतजार कर रही थी?
मालिक को कई बार दी गई सूचना
पड़ोसी हिमांशु रोहिला ने बताया कि हवेली कोमल जैन की है, जो फिलहाल जयपुर में रहते हैं। पिछले पांच महीने से लगातार उन्हें फोन और संदेशों के जरिए खतरनाक हालत की जानकारी दी जा रही थी। बार-बार समझाने के बावजूद मालिक ने ध्यान नहीं दिया। नगर परिषद के कर्मचारी भी नोटिस लेकर आता, लेकिन मालिक के घर पर कोई न मिलने के कारण वापस लौट जाता। इस वजह से कार्रवाई आगे नहीं बढ़ पाई। पड़ोसियों का आरोप है कि मालिक ने इस खतरनाक स्थिति को हल्के में लिया और प्रशासन ने भी जिम्मेदारी निभाने में गंभीरता नहीं दिखाई।
हादसे का मंजर और लोगों की दहशत
जैसे ही हवेली गिरी, पूरे इलाके में जोरदार धमाके की आवाज गूंजी। आसपास के लोग घबराकर घरों से बाहर निकल आए। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि हादसा उस वक्त हुआ जब रास्ता खाली था, वरना नजदीकी मोहल्ले के बच्चे अक्सर यहां खेलते रहते हैं और लोगों का आना-जाना भी लगातार बना रहता है। मुख्य रास्ता मलबे से पूरी तरह भर गया, जिसे बाद में हटाना शुरू किया गया। मोहल्लेवासी इसे भगवान की कृपा मान रहे हैं कि कोई हताहत नहीं हुआ।
पुलिस पहुंची, मलबा हटाने की कोशिश
हवेली गिरते ही इलाके में हड़कंप मच गया। सूचना पर कोतवाली पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची। पुलिस ने हालात का जायजा लिया और नगरपालिका को रिपोर्ट भेजी। इस पूरी घटना पर नगर परिषद के अधिकारी अब तक खुलकर कुछ भी कहने से बच रहे हैं।
लोगों की नाराजगी और मांग
मोहल्ले के लोगों का कहना है कि यह सिर्फ एक हवेली का मामला नहीं है। शहरभर में कई पुराने और जर्जर मकान खड़े हैं, जो कभी भी हादसे का कारण बन सकते हैं। नगर परिषद को चाहिए कि वह तुरंत ऐसे भवनों की सूची तैयार करे और खतरनाक ढांचों को गिरवाए। अगर प्रशासन अब भी गंभीर नहीं हुआ, तो अगली बार बड़ा हादसा होकर जनहानि हो सकती है।
बिना जनहानि के बचा हादसा, लेकिन चेतावनी
वार्ड नंबर 45 की यह घटना शहरवासियों के लिए चेतावनी है। इस बार तो गनीमत रही कि हादसे में कोई हताहत नहीं हुआ, लेकिन अगर अगली बार ऐसा हुआ और जनहानि हुई, तो इसका जिम्मेदार कौन होगा? लोग अब नगर परिषद से जवाब मांग रहे हैं कि आखिर वह खतरनाक मकानों को लेकर गंभीर कार्रवाई क्यों नहीं कर रही।
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