»✍🏻 शेखावाटी टुडे न्यूज़ ब्यूरो, ND News & Support Team
रामगढ़ शेखावाटी – नगर पालिका प्रशासन पर निजी स्वार्थ और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगातार गहराते जा रहे हैं। ताजा मामला कस्बे के सरकारी अस्पताल के पास स्थित पालिका अध्यक्ष दुदाराम चौहला के निजी कार्यालय से जुड़ा है, जहां नगर पालिका की फायर ब्रिगेड गाड़ी कार्यालय की धुलाई में इस्तेमाल होती देखी गई।
» फायर ब्रिगेड गाड़ी से ‘कार्यालय स्नान’
आम तौर पर आग बुझाने के लिए तैयार रहने वाली फायर ब्रिगेड गाड़ी, अध्यक्ष के निजी कार्यालय की सफाई में लगी दिखी। पाइप से सीधे पानी डालकर दीवारें और परिसर धोए जा रहे थे। लोगों को लगा शायद कहीं आग लगी है, लेकिन हकीकत सामने आते ही चर्चा गर्म हो गई कि सरकारी संपत्ति का इस तरह निजी उपयोग कैसे हो सकता है।
» पुराने विवाद भी याद दिला गए
यह पहला विवाद नहीं है। 19 जुलाई को नगर पालिका के सफाई कर्मचारियों को ‘मोहरा’ बनाकर दो पत्रकारों के खिलाफ मुर्दाबाद के नारे लगवाए गए थे। इससे पहले, अध्यक्ष के निजी मकान निर्माण के दौरान वाल्मीकि मोहल्ले के ट्यूबवेल के पास बजरी का ट्रक खाली करवाया गया था। बजरी ट्यूबवेल के अंदर चली गई, जिससे मोटर फंस गई। अब यह मोटर कभी खराब हुई तो पूरा ट्यूबवेल बेकार हो जाएगा। बाद में वही बजरी नगर पालिका के ट्रैक्टर से निर्माण स्थल पर पहुंचाई गई — जो सीधे सरकारी संसाधनों के निजी इस्तेमाल का उदाहरण है।
» नगर पालिका के ट्रैक्टर से निजी निर्माण सामग्री का परिवहन
स्थानीय सूत्रों का कहना है कि बाद में वही बजरी नगर पालिका के ट्रैक्टर से उठाकर अध्यक्ष के निर्माण स्थल तक पहुंचाई गई। यह सीधे-सीधे सरकारी संसाधनों के निजी उपयोग और भ्रष्टाचार का मामला है।
» नगर की सफाई व्यवस्था चौपट
दूसरी तरफ, पूरे नगर की सफाई व्यवस्था बुरी तरह चरमरा चुकी है। लोग लगातार शिकायत कर रहे हैं कि कचरा उठाने और सफाई करने का काम नाममात्र का हो रहा है। पट्टा वितरण में भी भारी धांधली की चर्चाएं हैं, जिन पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही।
» ठेकेदार गायब, काम चेहतों के हवाले
नगर पालिका का सफाई ठेकेदार लंबे समय से गायब बताया जाता है। उसका सारा काम अध्यक्ष के करीबी कुछ सफाई कर्मचारी ही संभाल रहे हैं। कई कर्मचारियों का वेतन बिना काम किए ही उठा लिया जाता है। ड्यूटी केवल कागजों पर दिखाई जाती है, जबकि ज़मीनी हकीकत बिलकुल अलग है।
» आवाज उठाने वालों पर दबाव
नगर के जानकारों का कहना है कि जो लोग इन गड़बड़ियों पर बोलने की कोशिश करते हैं, उन्हें दबाने के लिए अनुचित हथकंडे अपनाए जाते हैं। इसी कारण, भ्रष्टाचार और निजी लाभ के आरोपों के बावजूद प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई देखने को नहीं मिलती।
📌 निष्कर्ष
नगर पालिका की संपत्ति और संसाधन जनता की सेवा के लिए होते हैं, न कि किसी व्यक्ति के निजी इस्तेमाल के लिए। लेकिन यदि फायर ब्रिगेड गाड़ी से कार्यालय धोना, ट्यूबवेल में बजरी डालना, सफाई कर्मचारियों से निजी काम कराना और कागजों पर ड्यूटी दिखाकर वेतन उठाना जैसी गतिविधियां जारी रहीं, तो यह न केवल सार्वजनिक धन की बर्बादी है बल्कि जनता के विश्वास के साथ विश्वासघात भी है।


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