खानापूर्ति अभियान; दीवाली पर खाद्य पदार्थों के सैंपल लिए, 1 माह बाद भी रिपोर्ट नहीं आई, नतीजा-बाजार में खप गया माल

खानापूर्ति अभियान; दीवाली पर खाद्य पदार्थों के सैंपल लिए, 1 माह बाद भी रिपोर्ट नहीं आई, नतीजा-बाजार में खप गया माल

चूरू: स्वास्थ्य विभाग की खाद्य सुरक्षा टीम ने दीपावली पर त्योहारी सीजन में 6 से 19 अक्टूबर तक शुद्ध आहार, मिलावट पर वार अभियान के जरिए जिले में 100 से अधिक खाद्य सामग्री के सैंपल लिए। इनमें 50 सैंपल एक्ट वाले थे। एक्ट के लिए गए 50 सैंपल की रिपोर्ट अभी तक नहीं आई है। इधर, इसमें से अधिकतर माल बाजार में खप गया है। समय पर रिपोर्ट आने पर माल सप्लाई पर रोक भी लग सकती थी। अब विभाग की तरफ से सैंपलों की जयपुर से रिपोर्ट आने के बाद अमानक पाए जाने पर संबंधित व्यापारी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

जानकारी के अनुसार जिला मुख्यालय पर बनी खाद्य सुरक्षा मानक प्रयोगशाला में स्टाफ के अभाव के चलते एक्ट संबंधी सैंपल की जांच जयपुर करवानी पड़ती है। जयपुर भेजे गए सैंपल की रिपोर्ट 14 दिन में देने का प्रावधान है, लेकिन डेढ़ से दो महीने बाद ही जांच रिपोर्ट आती है। चूरू की लैब में सामान्य सैंपल की जांच तो हो जाती है।

जिला मुख्यालय पर दो खाद्य सुरक्षा अधिकारी काम कर रहे थे। इसमें से मदनलाल बाजिया के सेवानिवृत्त होने के कारण पद खाली हो गया है। रतन सिंह गोदारा झुंझुनूं में पदस्थापित हैं, उनके पास चूरू का भी अतिरिक्त चार्ज है। अभियान में गोदारा ने एक्ट की श्रेणी में 38 सैंपल लिए। इनमें घी के 9, मावे के 10, मिठाई के 7, तेल के 3, मिल्क प्रोडेक्ट 2, मसाले का 1 और अन्य छह सैंपल शामिल हैं। बाजिया ने एक्ट की श्रेणी में 12 सैंपल लिए, जिसमें घी के दो, मावे के छह, मिठाई के दो, तेल का एक, दूध का एक सैंपल शामिल है।

जिला मुख्यालय पर स्थित प्रयोगशाला में एक्ट के सैंपल जांच करने वाले स्टाफ की पूर्ति के लिए उच्चाधिकारियों को लिखा गया है। जयपुर भेजे गए एक्ट से जुड़े सैंपलों की रिपोर्ट भी जल्द मंगवाए जाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

-डॉ. मनोज शर्मा, CMHO चूरू

जिला मुख्यालय पर वर्ष 2018-19 में 40 लाख रुपए में बनी खाद्य सुरक्षा मानक प्रयोगशाला में 60 लाख रुपए की मशीन व उपकरण की व्यवस्था की गई थी। प्रयोगशाला में सात पद स्वीकृत हैं। फिलहाल जिला खाद्य विश्लेषक के पद पर बीकानेर के अधिकारी को अतिरिक्त चार्ज दिया हुआ है। सहायक खाद्य विश्लेषक का 1, लैब टेक्नीशियन के 3, परियोजना सहायक परिचालक के पद खाली है। कनिष्ठ सहायक पद पर दूसरे संकाय से एक व्यक्ति को लगा रखा है, जो सप्ताह में दो बार आते हैं। फिलहाल संविदा पर एक कंप्यूटर ऑपरेटर, एक तकनीकी व्यक्ति व एक मल्टी टास्क स्टाफ नियुक्त है। स्टाफ के अभाव में उपकरण व मशीन अनुपयोगी हैं।

वहीं लगातार जांच आदि नहीं होने के कारण प्रयोगशाला को मिला एनएबीएल सर्टिफिकेट भी निरस्त हो चुका है। स्टाफ के अभाव में एक्ट संबंधी सैंपल जयपुर भेजने पड़ते हैं। प्रयोगशाला में जनवरी से 31 अक्टूबर तक 2675 सामान्य सैंपल आए, जिनकी जांच आई। 624 किलो खाद्य सामग्री व 190 लीटर तेल सीज सीज किया था : खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने दीपावली पर अभियान के दौरान 624 किलो खाद्य सामग्री व 190 लीटर तेल सीज किया था। इसमें घी 184 किलो व मैदा 440 किलो था। इसी तरह 1034 किलो खाद्य सामग्री नष्ट करवाई थी। इसमें 359 किलो मिठाई, 20 किलो मिल्क प्रोडेक्ट, 10 किलो मसाले व 320 किलो अन्य सामग्री और 325 लीटर तेल शामिल है।

खाद्य सुरक्षा अधिकारी रतन सिंह गोदारा के अनुसार एक्ट संबंधी सैंपल के अमानक पाए जाने पर संबंधित के खिलाफ तीन महीने से आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान है। साधारण सैंपल अनसेफ मिलने पर तीन महीने का कारावास या 10 लाख रुपए के जुर्माने का प्रावधान है। खाने के बाद मौत होने की आशंका वाले अमानक सैंपल को लेकर आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान है। ये सभी मामले में कोर्ट में जाते हैं। सब स्टैंडर्ड अमानक पाए जाने पर पांच लाख तक का जुर्माना लग सकता है। मिस ब्रांड पर तीन लाख रुपए तक और मिस लीडिंग सैंपल पर दो लाख तक का जुर्माना लग सकता है। दुकानदार द्वारा वारंटी बिल पेश किए जाने पर संबंधित कंपनी के खिलाफ भी कार्रवाई की जाती है। {जयपुर भेजे जाने वाले सैंपल की जांच कर 14 दिन में रिपोर्ट भेजने का प्रावधान है।

हालांकि वर्कलोड की स्थिति में कमिश्नर की अनुमति से समय बढ़ा का प्रावधान है। ज्यादातर सैंपल डेढ़ से दो महीने तक ही आ पाते है। जिन खाद्य पदार्थों के सैंपल अमानक मिलने पर कार्रवाई का प्रावधान है, उसे एक्ट संबंधी सैंपल कहा जाता है। चूरू की लैब में एक व्यक्ति भी लगा दिया जाए, तो चूरू सहित झुंझुनूं व सीकर के एक्ट संबंधी सैंपलों की जांच भी चूरू हो सकती है।

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